संदेश

राधास्वामी जी

आप सभी को दिल से राधास्वामी जी 

अमल इस बात पर करो तो मुक्ति संभव

चित्र
Radha soami- जब भी हम सत्संग में जाते हैं। तो बाबाजी हमेसा हमें समझते है की भाई अमल करो। अब बात आती है अमल किस पर करना है। भाई अमल नामदान मिला है। उस पर करना है। भजन-सुमिरन करना है। ज्यादा से ज्यादा हमें भजन को समय देना चाहिए। अगर हम नामदान मिलने के बाद नहीं अमल नहीं करते तो हमारा जीवन बेकर है। नामदान की किम्मत कोई बिरला ही जानें। संत महात्मा समझाते है की नाम क्या है? उसकी असलियत क्या है? वो क्या चीज़ है? उसकी किम्मत क्या है? इसकी असलियत हर कोई नहीं जानता। कोई बिरला जीव जो गुरु के हुक्म की पालना करता होगा वही जीव इसकी अहमियत को जान सकता है। हमने बहुत बार सुना होगा की बंदर क्या जानें अदरक का स्वाद। ये बात बिल्कुल सही साबित होती है। क्यों कि जिस जीव के अंदर अगर परमात्मा के प्रति तड़फ नहीं है प्यार नहीं है वो इसकी अहमियत को नहीं समझ सकता। हमें कोई चीज़ अगर मुफ्त में मिल जाती है तो हम उसकी कदर नहीं करते। क्योंकि वो मुफ्त में मिली है। अगर हम उसी चीज़ को अपने पैसों से खरीद कर लाते तो हम उसको बहुत संभाल कर रखते। उसकी देखरेख करते की कहीं बेकार ना हो जाये। बस यही कारण है की हम नामदान ...

गुरु बिन कोई नही संगयन में

चित्र
Radha soami- कोई भी जीव इस दुनिया में आता है तो उसके साथ सदा उस परमात्मा का हाथ उसके सिर पर बना रहता है। उसी की मेहर से ही हम दुनिया का सफर तय करते हैं। मालिक हमारे अंग-संग  बाबाजी कई बार फ़रमाते है कि हर घड़ी, हर पल वो मालिक हमारे अंग-संग रहता है। दुःख-सुखः में कभी भी मालिक आपका साथ नही छोड़ते। परन्तु हम इस बात पर ध्यान नहीं देते, की हमारा भी कोई फ़र्ज़ बनता है उस मालिक के प्रति। हमे भी गुरु के प्रति प्रेम जगाना चाहिए। क्योंकि गुरु के बिना हम किसी भी कार्य में सफल नहीं हो सकते।  हमें परमात्मा की भक्ति और ज़ोर देना चाहिए। हमें मनुष्य जन्म मिला है तो उनका फायदा उठाना चाहिए। क्योंकि की मनुष्य जन्म सबसे उत्तम जन्म होता है। औऱ हम परमात्मा की भक्ति भी इसी जन्म में कर सकते हैं। आपको दुःखो का सामना नहीं करना पड़ेगा आप उस कुल मालिक की भक्ति करोगे तो कभी भी आपको दुःखो का सामना नहीं करना पड़ेगा। अगर फिर भी अगर आपको दुःखो का सामना करना पड़ता है वो भी बड़ी आसानी से निकल जायेगा। 

जीवन में आये और ये नहीं किया तो सब बेकार

चित्र
Radha Soami- बाबा जी फरमाते हैं कि अगर दुनिया में आये हो और सत्संग का साथ मिला है तो आप बहुत भाग्यशाली हो। क्योंकि की बड़े खुशनसीब जीवों को ही मनुष्य जन्म मिलता है। और ऐसे ही खुशनसीब जीवों को सत्संग मिलता है। लेकिन फिर भी बहुत से लोग इस जीवन का लाभ नहीं उठाते। नामदान ही एक रास्ता बाबाजी हर बार अपने सत्संग में फ़रमाते है कि अगर परमात्मा को पाना है। और अपने निजघर जाना है तो गुरु के हुकमनुसार चलना पड़ेगा। उनके बताये गये रास्ते चलना पड़ेगा। बाबाजी बताते हैं कि अगर नेक नीति से चलोगे तो हर काम बनते चले जायेंगे। और असल काम जो हम करने आये है वो भी बड़ी आसानी से हो जाएगा। कोनसा काम? वो काम है गुरु से नाम की प्राप्ति। जब हम सत्संग में जाते हैं तब हमें नामदान की अहमियत का पता चलता है। नामदान ही जिसके सहारे हम परमात्मा के घर जा सकते हैं। ये अंतिम अवसर गुरु के मतानुसार मनुष्य जन्म ही आखिरी और अंतिम अवसर है जिससे हम अपने लक्ष्य की प्राप्ति कर सकते है। अगर मनुष्य जन्म हाथ से निकल गया तो पता नहीं कितने सालों तक दुखों का पहाड़ उठाना पड़ेगा। कितनी योनियों में भटकना पड़ेगा। इसलिए बाबा जी बार-बार हि...

कर्मों का हिसाब करना है तो ये काम करो।

चित्र
Radha soami- सभी संत यही दोहराते आए हैं कि कर्मों का हिसाब इसी जन्म में करना पड़ता है। लेकिन कर्मों का हिसाब तो करना पड़ेगा, मगर हम उसको बहुत सरल तरीके से कर सकते हैं। यानी कि हम अपने कर्मों का बोझ हल्का कर सकते हैं। अपने बुरे कर्मों का हिसाब, बोझ अगर हमें काम करना है, तो हमें एक आसान काम करना पड़ेगा। हमें किसी संत कि शरण में जाना होगा।  जिससे हम कर्मों के बारे में बहुत कुछ जान सकते हैं और उनसे कैसे छुटकारा पाया जाए। इसकी युक्त भी हमें मिल जाती है। संत बताते हैं की कर्मों का भुगतान तो हमें इसी योनि में करना पड़ता है। मगर हमें उनका कुछ कम कर सकते हैं। वह कैसे कर सकते हैं? कि हम अपने गुरु से नामदान की युक्ति प्राप्त करके और भजन-सुमिरन करके हम यह काम आसान कर सकते हैं। इसलिए हमें किसी पूरे गुरु की शरण में जाना चाहिए। उनसे रूहानियत के बारे में जानकारी प्राप्त करनी चाहिए। क्योंकि संतो को पूरा अनुभव होता है कि कैसे रूहानियत पर चल कर हम अपने कर्मों का बोझ हल्का कर सकते हैं। और अपने निजघर पहुंच सकते हैं। इसलिए हम सब भजन-सुमिरन करें परमात्मा को प्राप्त करें।

कर्मों का हिसाब इसी जन्म में हो जाता है, यक़ीन नहीं तो ये पढ़ो।

चित्र
Radha soami- सन्त-महात्मा बताते हैं कि अपने किये हुये सभी कर्मों का हिसाब इसी जन्म में हो जाता है। लेक़िन जीव समझ नहीं पाता। जो जीव किसी रूहानी विचारधारा वाले संगठन से जुड़ा है तो बड़ी आसानी से समझ सकता है। क्योंकि वहां पर रूहानियत के बारे में बताया जाता है कि कैसे जीव आने कर्मों का भुगतान करता है। किसी के कर्म आसानी से काट जाते हैं किसी को बहुत भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। महात्मा बताते हैं कि इस चौरासी के जेलखाने में सब जीव अपना भुगतान करने आते हैं। कोई जीव कीड़े - मकोड़े, कोई जीव जानवर, कोई जीव पक्षियों के जन्म लेकर अपने कर्मों का भुगतान कर रहे हैं। किसी के अच्छे कर्म होते हैं वो जीव अच्छे से जीवन व्यतीत करते हैं बाकी जीव पूरी जिंदगी परेशानियों में निकल देते हैं। बाबाजी के शब्द सुनने के लिए सब्सक्राइब करें। Radhasoami Shabad फिर बात आती है कि कर्मों को कैसे कम किया जाये। या कर्मों को कैसे काटा जाये। सन्त बताते हैं कि भाई किसी सन्त कि शरण में जाओ। किसी पूरे गुरु से रूहानियत की शिक्षा प्राप्त करो। नामदान प्राप्त करो। और भजन-सुमिरन करके अपने कर्मों का बोझ कम कर सकते ह...

नानक दुखीआ सभ संसार, आओ इस पर करें विचार

चित्र
Radha Soami - सन्त समझाते हैं की भजन-सिमरन द्वारा हमें आज के वर्तमान पल में विचरने, इस पल में एकाग्र और स्थिर होने का प्रशिक्षण मिलता है। ध्यान सुमिरन में रखने से हम हौमें को बल देने वाली अतीत की यादों और भविष्य की चिंताओं से मुक्त हो जाते हैं। जब ध्यान वर्तमान में हो तो मन हमें अपने जाल में नहीं फंसा सकता। ध्यान को सारे दिन भजन-सिमरन में रखने से हम इसे वर्तमान में खड़ा करने में सफल हो जाते हैं। इस तरह हम हौंमें के बंधनों से मुक्त हो जाते हैं और पल-पल जीवन का आनंद लेते हैं। संसार के सब लोग दुखों और मुसीबतों के सागर में गोते खा रहे हैं। कोई बेरोजगारी और निर्धनता के कारण दुखी है, किसी को रोग के कारण कष्ट है और किसी के घर में मृत्यु हो जाने से शोक छाया हुआ है। गुरु नानक साहिब कहते हैं  नानक दुखिआ सब संसार। सो सुखिया जिस नाम आधार।। मुसलमान संतों ने भी संसार को दुखों का घर कहा है। संसार के दो भाग हैं- जल और थल।  जल में छोटी मछली को बड़ी मछली खा जाती है और बड़ी मछली को और बड़ी मछली निंगल जाती है। थल पर भी बड़े पक्षी छोटे पक्षियों को और बड़े पक्षी छोटे पक्षियों को और छोट...
चित्र
Radha soami -कुछ दिन पहले मेरे साथ वाले गांव की एक सतसंगी की बात है। जिसे बाबा जी से नामदान मिला हुआ था। भजन करता रहा पर कुछ ना दिखने पर गुस्से हो गया और कुछ समय बाद वो गलत रास्ते पर जाने लगा।  वह एक पीर की पूजा करने लगा और धागा तवीज करने लगा। और उस पर पीर का साया आता था। बहुत साल बीत गए तो उसकी मौत हो गई। उसके और रिश्तेदार भी सतसंगी थे। उन्होंने ने सोचा की उसकी आत्मा का पता तो करें, की सतगुरु के पास है या उस पीर के पास।  दूसरे सत्संगी भाइयों ने जब उस सत्संगी के बारे में पूछा। जिसकी वो पूजा करता था । तो उसी पीर का साया किसी और पर भी चलता था। वह व्यक्ति भी नजदीक का था तो जब वो व्यक्ति गुरूवार को पीर के साये मे बैठा हुआ था, तो उन्हें पूछा- की वो तुम्हारे सेवक की मौत हो गई है तो वो तो आपके पास होगा। वो किस हालात मे है। तब उस व्यक्ति जो पीर के साये में था, उसने जवाब दिया की पहले आया तो वो हमारे पास ही था।  बाबाजी के शब्द जब सुन्दर और मनमोहक, छवि वाले सरदार जी आये । पर कुछ समय बाद एक बहुत सुन्दर और मनमोहक, छवि वाले सरदार जी आये थे। उसने कहा कि यह मेरा सत...

सेवा सिमरन औऱ सत्संग से सुख नही तो किसकी कमी: बाबाजी ने ये बताया

चित्र
Radha Soami - बाबाजी  फरमाते हैं नाम बड़ी ऊँची दौलत है। बड़े भाग्य से मिलता है। जो भाग्य से मिला है तो इसकी कदर करो। दबा कर कमाई करो। हमारा एक एक स्वांस करोड़ की कीमत का है। इसको ऐसे ही न खोवो। सतगुरु जिस दिन नाम देते उस दिन से शिष्य के अंदर बैठ जाते हैं, यह बात शिष्य नहीं समझता। यदि शिषय कमाई करे तो देख ले। बुलेशाह ने भी कहा है-  असाँ ते वख नहीं, देखन वाली अख नहीं, बिना शौह थी, दूजा कख नहीं। गुरु  नानक  देव  जी दुनिया  के  जीव  बहुत  बुरी  तरह  काल  के  जाल  में  फँसे  हुए  हैँ ।  जो  कर्म  पहले  किये  हैं। उनका  नतीजा  अब  रो-पीटकर  भोग  रहे  हैं और उसी  तरह  बुरे-खोटे  पाप  और  कर्म  करते  जा  रहे  हैं ।  भूले  हुए  हैं  कि  इनका  नतीजा  भोगने  के  लिये  फिर  इसी  चौरासी  के  चक्कर  में  आना  पड़ेगा ।...

भजन-सिमरन के द्वारा ही अंदरुनी दर्शन संम्भव है: बाबाजी

चित्र
Radha Soami -संत अपने अनुभव के अनुसार हमें रूहानियत के बारे में समझाते हैं। उनके हर सत्संग में केवल और केवल उस परमपिता परमात्मा की दर्शनों की बारे में  समझाते हैं। उनके दर्शन कैसे किए जाएं, उनकी दर्शन कैसे होते हैं, यही सब बातें हमें बार-बार संत-महात्मा उदाहरण दे देकर कर समझाते हैं। दर्शन कैसे होते हैं? कितने प्रकार की होते हैं? यही सब हम आज जानेंगे। रूहानियत में इन सब बातों का ध्यान रखना जरूरी है: बाबाजी          दर्शन तीव्र और गहरे प्रेम का नतीजा है। जब हम बिना कोई कोशिश की सतगुरु की ओर टकटकी लगाकर देखने के लिए मजबूर हो जाते हैं; जब हम उनके आभा मंडल को, उनके नूर को देखकर मुग्ध हो जाते हैं, दंग रह जाते हैं। जब हम उनकी और इस तरह खींचे चले जाते हैं जैसे कोई सुई चुंबक की ओर, जब हम उनकी मौजूदगी में इतने लीन हो जाते हैं, खो जाते हैं मानो दुनिया ठहर गई हो और किसी दूसरी चीज की अहमियत नहीं रहती; जब कशिश इतनी जबरदस्त होती है कि उस पर हमारा वश नहीं रहता और हम अपने आसपास की हर चीज से बेखबर हो जाते हैं- यह भी दर्शन हैं। ...

सत्संगों में से कुछ महत्वपूर्ण चुने हुये प्रेरणादायी वचन

चित्र
Radha Soami- संत हमेशा अपने सत्संग में केवल उस परमपिता परमात्मा की प्राप्ति का रास्ता बताते हैं। वहां पर केवल नाम की युक्ति के बारे में समझाते हैं। बताते हैं कैसे?  उस परमपिता परमात्मा को पाए जा सकता है। आज हमने कुछ महत्वपूर्ण शब्द चुने हैं जो रूहानियत के बारे में हमें बहुत सी जानकारी देते हैं। संत कहते हैं की सभी मनुष्य नामरूपी अनमोल रतन प्राप्त करने के लिए इस संसार में आते हैं। परंतु कोई विरले गुरमुख ही इस काम में सफल हो पाते हैं। जो नाम प्राप्त नहीं करते, उन्हें दोबारा जन्म लेना पड़ता है और माता के गर्भ में नौ माह तक उल्टे लटक कर घोर प्रायश्चित करना पड़ता है। उस समय आत्मा का ध्यान निरंतर तीसरे दिन में लगा रहता है और यही ध्यान उसकी रक्षा करता है। वह इस नरक से छुटकारा पाने के लिए प्रभु के चरणों में लगातार प्रार्थना करता रहता है कि अब जन्म मिलने पर वह प्रभु को एकदम याद रखेगा। राधा स्वामी संत मार्ग जन्म लेने के बाद परमात्मा को भूल जाता है मनुष्य जब जीव का जन्म होता है तो सारे परिवार में प्रसन्नता की लहर दौड़ जाती है और सब उससे प्यार करते हैं। उसे चारों और सुंदर दृश्य...

रूहानियत में सतगुरु के बिना कोई सहयोगी नही: बाबाजी

चित्र
Radha soami- बाबाजी अपने सत्संग में बार-बार फ़रमाते रहते है कि भजन सिमरन बहुत जरूरी है। बीना इसके कुछ भी नही है। और यही आखिरी मौका है। इसके बाद आपको ये मनुष्य जन्म नही मिलेगा। भले ही हजारों सूर्यों का प्रकाश हो जाए, लेकिन रूहानी मार्ग में सतगुरु के बिना हम अज्ञानता और अंधकार में है। बिना सतगुरु के मुक्ति कभी नहीं मिल सकती। ये भी पढ़ें : मनुष्य जन्म को सार्थक करना है? तो रूहानियत में इन बातों का रखें ख्याल सतगुरु का कार्य सतगुरु का कार्य है हमें उपदेश की याद दिलाना और भजन-सिमरन द्वारा हमारा ध्यान और परम ज्ञान की ओर, उसकी पहचान की ओर ले जाना जो रूहानियत का मूल स्त्रोत है, क्योंकि भजन-सिमरन ही हमारे आंतरिक अभ्यास की बुनियाद है। नामदान से हर मुक़ाम हासिल सतगुरु हमें वह युक्ति बताते हैं जिससे शिष्य की आत्मा एकाग्र होकर अंतर में जुड़ जाती है। वह हमें सिखाते हैं कि कैसे मन को एकाग्र करके सतगुरु के स्वरुप पर ध्यान टिकना आना है। और कैसे उस परमपिता परमात्मा को पाना है। यही सतगुरु का सीधा साधा उपदेश है।

मनुष्य जन्म को सार्थक करना है? तो रूहानियत की इन बातों पर करें अमल

चित्र
Radha Soami- हम अपने इस मनुष्य जन्म को सार्थक कर सकते हैं। हम उस परमपिता परमात्मा को पा सकते हैं। बस  हमें कुछ रूहानियत की बातों पर अमल करना होता है। अगर हम उन रूहानियत के नियमों के अनुसार चलेंगे तो हम परमपिता परमात्मा को पा लेंगे और इस चौरासी के जेलखाने से आजाद हो सकते हैं। क्या है रूहानियत के नियम जानें? 1. सबसे पहले अपने व्यवहार में सादगी बनायें रखें। 2. हर किसी व्यक्ति का सम्मान करें और सत्संग से जुड़े रहें। 3. कभी किसी का दिल ना दुखायें। प्यार और प्रेम बनाए रखें। 4. मुसीबत में एक-दूसरे व्यक्ति की मदद करें। 5. पूर्ण सतगुरु की खोज करें, उसके हुकुम में चलें Also read :   रूहानियत में इन बातों पर ध्यान रखना जरूरी है:  बाबाजी 6. हक हलाल की कमाई करें, हक हलाल की कमाई पर गुजारा करें। 7. सतगुरु के बताए गए उपदेशों पर चलें। गलत संगति में ना बैठें। 8. किसी प्रकार का नशा ना करें। पराई स्त्री को बहन, माता, पुत्री के समान समझें। 9. किसी जीव की हत्या ना करें और उस परमपिता परमात्मा का ध्यान करें। 10. सतगुरु द्वारा प्राप्त नामदान से हम उस परमपिता परमात्मा को...

रूहानियत में इन बातों पर ध्यान रखना बहुत जरूरी है : बाबाजी

चित्र
Radha Soami- संतों की शरण किसी क़िस्मत वाले को मिलती है। और जो इंसान संतों की शरण में चला जाता है। समझो उसका परमात्मा से मिलने का रास्ता साफ हो गया। वो इंसान अपने संत-सतगुरु से नाम की युक्ति प्राप्त करके, रूहानियत की राह पर चल कर अपने जीवन को सार्थक कर सकता है। हक हलाल की कमाई पर गुजारा  संत हमेशा रूहानियत के रास्ते पर चलने की नेक सीख बतलाते हैं। हमें सत्य पर चलना और हक हलाल की कमाई पर गुजारा करने की प्रेरणा देते हैं। क्योंकि हक हलाल की कमाई से हमारा मन ज्यादा विचलित नहीं होता, वह सही राह पर रहता है। इसलिए हमें हक हलाल की कमाई पर गुजारा करना चाहिये। Read also : मन में नम्रता, सेवा भाव से भजन सुमिरन में आसानी होती हैं एक रूहानियत की खास कला हमें अपना व्यवहार बिल्कुल शांत स्वभाव में रखना चाहिये। जितना हम शांत स्वभाव में रहेंगे, उतना ही हमारा मन एकाग्र होगा। और आसपास में अपना वातावरण भी खुशनुमा रहेगा। हर व्यक्ति के साथ बड़ी नम्रता से पेश आना चाहिए। यह एक रूहानियत की खास कला है, जिसके जरिए हम मन को एकाग्र करने में बहुत बड़ी सफलता प्राप्त कर सकते हैं। Read...

सतगुरु परमात्मा और जीवों के बीच की कड़ी: बाबाजी

चित्र
Radha Soami- सतगुरु एक रूहानी मार्गदर्शक यानी आदर्श हैं। उनका कार्य परमार्थ की खोजियों को सांसारिक बंधनों से छुड़ाकर रूहानियत के परम लक्ष्य तक ले जाना । सतगुरु सर्वोच्च है, सर्वव्यापक है और सब कुछ उन में समाया हुआ है। वहीं केंद्र बिंदु है, मध्य बिंदु और आधार बिंदु है। सतगुरु सृष्टि का रहस्य की कुंजी सतगुरु सृष्टि का रहस्य जानने की कुंजी है। सारा ब्रह्मांड उन्हीं में समाया हुआ है। जो सतगुरु के शब्द स्वरूप से जुड़ गए हैं। जिन्होंने उनका नूरी स्वरूप देखा है, जिन्हें आंतरिक अनुभव हो चुका है, वे जानते हैं कि सतगुरु और परमात्मा के बीच कोई भेद नहीं है। उनके लिए सतगुरु और परमात्मा एक ही है, अलग नहीं है।वह परमात्मा का हिस्सा है। यह भी पढ़े : मन में नम्रता, सेवा भाव से भजन सुमिरन में आसानी होती हैं दोनों एक ही शब्द, एक ही तेज़, एक ही शक्ति और एक ही चेतना है, ठीक उसी तरह जैसे सूरज और उसकी किरण। हमें निजी अनुभव से यह एहसास हो जाता है कि हमारे लिए पहली सच्चाई सतगुरु है, उसके बाद परमात्मा। यह भी पढें : क्या सतगुरु परमात्मा हैं? ज्यादा जानकारी के लिए पढ़ें परमात्मा हम...

क्या सतगुरु परमात्मा हैं? ज्यादा जानकारी के लिए पढ़ें

चित्र
Radha Soami -संत-महात्माओं ने अपनी वाणी में कई जगह फ़रमाया है कि सतगुरु परमात्मा का रूप है और वे मनुष्य जन्म में आकर हमे रूहानियत का पढ़ पढ़ते हैं। हमे एक सच्ची राह पर चलने का पाठ पढ़ाते हैं ताकि हम इस मनुष्य जन्म का लाभ उठा कर परमात्मा में समा जायें। विश्वास की अहम कसौटी भजन-सुमिरन करना : क्या सतगुरु परमात्मा है या नहीं ? अगर हमें विश्वास है कि सतगुरु परमात्मा है तो इस विश्वास की सबसे अहम कसौटी यह है कि क्या हम उनके हुक्म के मुताबिक भजन-सुमिरन करते हैं? जिन्हें हम सतगुरु मानते हैं, अगर हम उनके लिए एक और सिर्फ एक हुकुम का पालन नहीं करते तो हम अपने विश्वास के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, हम केवल दिखावा कर रहे हैं कि हमें विश्वास है, क्योंकि सतगुरु के हुक्म का पालन न करने की गुस्ताखी कौन करेगा? बाबाजी के कथन : - शब्द के पांच नाम जिनसे होता है परमात्मा से मिलन सत्य को जानने की इच्छा जन्म से ही : हम सबके अन्दर सत्य को जानने की इच्छा जन्म से ही है। इससे हमें सीखना नहीं पड़ता, इस जिज्ञासा को न तो हम खुद पैदा करते हैं और ना ही कहीं बाहर से अपनाते हैं। यह जांच-परख और सवाल करने...

शब्द के पांच नाम जिनसे होता है परमात्मा से मिलन

चित्र
संत महात्मा समझाते हैं चाहे जीतने वेद शास्त्र पढ़ लें, कितने भी सत्संग सुन लें,  किसी भी संत-महात्मा के पास चले जाएं। लेकिन उसका जब तक कोई फायदा नहीं होता। जब तक हम गुरु से रूहानियत के बारे में कोई विधि ना जान लें। तुसली साहब की वाणी चार अठारह नौ पढ़े, षट पढ़ी खोया मूल। सूरत सबद चीन्हे बिना, ज्यों पंछी चंडूल।। अर्थात - चाहे कोई चारों वेद, अठारह पुराण, नौ व्याकरण और छ: शास्त्र भी पढ़ लें, लेकिन अगर उसने सुरत-शब्द का ज्ञान प्राप्त नहीं किया तो उसकी यह हालत चंडोल पक्षी जैसी है, जिसके लिए कहा जाता है कि जैसी बोली वह सुनता है उसी की वह नकल कर लेता है। इसलिए हमें सुरत-शब्द का ज्ञान प्राप्त करना जरूरी है। गुरु जी के विचार : सुमिरन करते समय सतगुरु का ध्यान लाभदायक : बाबाजी पूर्ण गुरु से शब्द की प्राप्ति संत सतगुरु समझाते हैं कि हमें पूर्ण गुरु से ही रूहानियत के रास्ते की जानकारी मिलती है।  उनसे ही हमें पांच शब्दों का भेद मिलता है। और इन पांच शब्दों के द्वारा हमें अपने सच्चे घर ले जाता है। स्वामी जी महाराज भी अपनी वाणी में फरमाते हैं कि शब्द-स्वरूपी, शब्द-अभ्य...

सुमिरन करते समय सतगुरु का ध्यान लाभदायक : बाबाजी

चित्र
सुमिरन मन द्वारा करना चाहिए और किसी दूसरे व्यक्ति को सुनायी नही देना चाहिए। इस तरह सुमिरन करना आदत डालनी वाली बात ही है। लगातार चलने रहने वाला सुमिरन प्रेम और श्रद्धा भरे जीवन में प्रवेश का गुप्त द्वार है। क़ुरान मजीद चाहे तुम बात उच्च स्वर में कहो (या धीमे स्वर में ), वह तो छिपी हुई बातों और अत्यन्त निहित बात को भी जानता है। अल्लाह ! उसके सिवा कोई 'इलाह' ( पूज्य ) नहीं। उसके सभी नाम शुभ हैं। नाम या परमात्मा की बराबरी नही परमात्मा और उसका नाम संसार की मीठी से मीठी और प्यारी से प्यारी चीजों से भी कहीं अधिक मीठा और प्यारा है ।  संसार की कोई भी वस्तु परमात्मा और उसके नाम की बराबरी नहीं कर सकता । बाबाजी के कथन : बीना नाम ना उतरे पार, अब है मौका करले विचार सतगुरु अंग-संग महसूस जब सुमिरन लगातार चलता रहता है तो हमें अपने अंदर दिव्य-चेतना का अस्तित्व महसूस होने लगता है । यह अपने आप में ही हमारा भजन-सुमिरन बन जाता है। सतगुरु के दिए नाम का प्रेमपूर्वक सुमिरन करने से सतगुरु अंग-संग महसूस होते हैं। भजन-सुमिरन सहज भाव से करना चाहिए। सुमिरन करने की गति तेज नहीं हो...

बीना नाम ना उतरे पार, अब है मौका करले विचार

चित्र
Radha Soami-संत हमेशा सच पर विचार रखते हैं। संत अपने हर सत्संग में सच के बारे में बतलाते हैं। उस सच के बारे में बतलाते हैं जो हम खुली आंखों से नहीं देख सकते। क्योंकि खुली आंखों से हम केवल संसार को और संसार के अंदर जो भी पदार्थ हैं, हम केवल उन्हीं को देख सकते हैं। सच के लिए वक्त के सतगुरु की शरण सच को जानने के लिए, सच को देखने के लिए हमें वक्त के संत सतगुरु की आवश्यकता पड़ती है। हमें वक्त के सतगुरु की शरण चाहिए। वक्त की संत सतगुरु से शब्द, नामदान की प्राप्ति करके, हमें उसका सुमिरन करना है। उस परमपिता परमात्मा की भक्ति करनी है। हमें भजन-सिमरन करना है ताकि सच से सामना हो सके। बाबाजी के विचार : प्रयास से ही प्रगति सम्भव है, हार ना मानें भजन सिमरन ही एक रास्ता संत महात्माओं ने अपने सत्संगों में, अपने किताबों में अपने अनुभव हमें समझाते हैं। संत ग्रंथों के जरिए हमें फरमाते हैं की परमात्मा से मिला करना या परमात्मा को पाना है तो केवल भजन-सुमिरन ही एक रास्ता है। इसके अलावा कोई और दूसरा रास्ता नहीं है। अगर भजन-सुमिरन करेंगे तो हम उस परमपिता परमात्मा से जा मिलेंगे। अ...

प्रयास से ही प्रगति सम्भव है, हार ना मानें ।

चित्र
महाराज सावन सिंह जी फ़रमाते है कि यह हरएक सत्संगी का धर्म है कि वह अपने मन को स्थिर करके तीसरे तिल में पहुँचे। गुरु का कर्तव्य सत्संगियों को इस मार्ग में मदद और रहनुमाई देना है। मन तथा इंद्रियों को क़ाबू करना और दसवीं गली में प्रवेश करना शिष्य की कोशिश पर निर्भर करता है। इस काम को पूरा करने में ख़ास बात अभ्यासी की कोशिश है। महाराज सावन सिंह जी  जिस पल हमें नाम दान की बख्शीश होती है हम पर भजन सुमिरन के लिए आवश्यक दया मेहर भी कर दी जाती है उसके बाद सब कुछ हमारी कोशिश पर निर्भर करता है कि हम उस दे मेहर का कितना फायदा उठा सकते है राधास्वामी सत्संग : सच को जानो, वही सच आपको परमात्मा से मिला सकता है: बाबाजी जैसी कि बड़े महाराज जी ने ऊपर दिए उद्धरण में फरमाया है, हमें अपने प्रयास द्वारा मन को स्थिर कर के तीसरे तिल पर पहुंचाना है। यह काम हमारे लिए सतगुरु नहीं करेंगे। यह हमारा काम है। हमें हर रोज भजन-सिमरन करना है। हम अंदर तभी भी जा पाएंगे, जब हम भजन-सुमिरन के लिए बैठेंगे और अपनी तवज्जुह को तीसरे दिन पर एकाग्र करेंगे। यह काम केवल हम ही कर सकते हैं। राधास्वामी सत्संग : आ...