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असलियत जानने बिना मुक्ति नहीं, यहां पर मुक्ति संभव

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सबसे पहले तुम प्रभु की राज्य में पहुंचने का प्रयास  करो, फिर तुम्हें सबकुछ स्वतः ही प्राप्त हो जायेगा | हमारा असल, हमारी आत्मा असीमित है| यह हर प्रकार की सीमा-बंधनों से मुक्त है| परंतु हमने अपनी तवज्जुह उस असीमित सम्पूर्ण प्रकृति से हटाकर, अपने व्यक्तित्व की सीमित, सापेक्ष, साधारण परिस्थितियों की ओर मोड़ ली है| जब तक हमारा ध्यान अपने यथार्थ यानी असलियत की ओर से हटा रहेगा, हम द्वैत में फँसे रहेंगे और उस परम आनंद से जो कि हमारी पहुंच में है, सदा अनजान रहेंगे| उससे दूर रहेंगे| संसार और इसकी वस्तुओं के मायाजाल में उलझ कर हम अपना जीवन बर्बाद कर देते हैं| बार-बार हम इस भौतिक जगत की माया और भ्रम का शिकार होते रहते हैं| विचार करने योग्य :- संतों का कहना, परमात्मा एक है सूफी संत मौलाना रूम कहते हैं     हमारी अवस्था उस सेवक के जैसी है जो अपनी राजा के हुक्म से किसी के लिए किसी दूसरे मुल्क में जाता है| वह सेवक उस मुल्क में जाकर कई अद्भुत और आश्चर्यजनक कार्य करता है और फिर अपने राजा के पास लौट आता है| राज दरबार में राजा उससे पूछता है   ...