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क्या सतगुरु परमात्मा हैं? ज्यादा जानकारी के लिए पढ़ें

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Radha Soami -संत-महात्माओं ने अपनी वाणी में कई जगह फ़रमाया है कि सतगुरु परमात्मा का रूप है और वे मनुष्य जन्म में आकर हमे रूहानियत का पढ़ पढ़ते हैं। हमे एक सच्ची राह पर चलने का पाठ पढ़ाते हैं ताकि हम इस मनुष्य जन्म का लाभ उठा कर परमात्मा में समा जायें। विश्वास की अहम कसौटी भजन-सुमिरन करना : क्या सतगुरु परमात्मा है या नहीं ? अगर हमें विश्वास है कि सतगुरु परमात्मा है तो इस विश्वास की सबसे अहम कसौटी यह है कि क्या हम उनके हुक्म के मुताबिक भजन-सुमिरन करते हैं? जिन्हें हम सतगुरु मानते हैं, अगर हम उनके लिए एक और सिर्फ एक हुकुम का पालन नहीं करते तो हम अपने विश्वास के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, हम केवल दिखावा कर रहे हैं कि हमें विश्वास है, क्योंकि सतगुरु के हुक्म का पालन न करने की गुस्ताखी कौन करेगा? बाबाजी के कथन : - शब्द के पांच नाम जिनसे होता है परमात्मा से मिलन सत्य को जानने की इच्छा जन्म से ही : हम सबके अन्दर सत्य को जानने की इच्छा जन्म से ही है। इससे हमें सीखना नहीं पड़ता, इस जिज्ञासा को न तो हम खुद पैदा करते हैं और ना ही कहीं बाहर से अपनाते हैं। यह जांच-परख और सवाल करने...

शब्द के पांच नाम जिनसे होता है परमात्मा से मिलन

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संत महात्मा समझाते हैं चाहे जीतने वेद शास्त्र पढ़ लें, कितने भी सत्संग सुन लें,  किसी भी संत-महात्मा के पास चले जाएं। लेकिन उसका जब तक कोई फायदा नहीं होता। जब तक हम गुरु से रूहानियत के बारे में कोई विधि ना जान लें। तुसली साहब की वाणी चार अठारह नौ पढ़े, षट पढ़ी खोया मूल। सूरत सबद चीन्हे बिना, ज्यों पंछी चंडूल।। अर्थात - चाहे कोई चारों वेद, अठारह पुराण, नौ व्याकरण और छ: शास्त्र भी पढ़ लें, लेकिन अगर उसने सुरत-शब्द का ज्ञान प्राप्त नहीं किया तो उसकी यह हालत चंडोल पक्षी जैसी है, जिसके लिए कहा जाता है कि जैसी बोली वह सुनता है उसी की वह नकल कर लेता है। इसलिए हमें सुरत-शब्द का ज्ञान प्राप्त करना जरूरी है। गुरु जी के विचार : सुमिरन करते समय सतगुरु का ध्यान लाभदायक : बाबाजी पूर्ण गुरु से शब्द की प्राप्ति संत सतगुरु समझाते हैं कि हमें पूर्ण गुरु से ही रूहानियत के रास्ते की जानकारी मिलती है।  उनसे ही हमें पांच शब्दों का भेद मिलता है। और इन पांच शब्दों के द्वारा हमें अपने सच्चे घर ले जाता है। स्वामी जी महाराज भी अपनी वाणी में फरमाते हैं कि शब्द-स्वरूपी, शब्द-अभ्य...

सुमिरन करते समय सतगुरु का ध्यान लाभदायक : बाबाजी

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सुमिरन मन द्वारा करना चाहिए और किसी दूसरे व्यक्ति को सुनायी नही देना चाहिए। इस तरह सुमिरन करना आदत डालनी वाली बात ही है। लगातार चलने रहने वाला सुमिरन प्रेम और श्रद्धा भरे जीवन में प्रवेश का गुप्त द्वार है। क़ुरान मजीद चाहे तुम बात उच्च स्वर में कहो (या धीमे स्वर में ), वह तो छिपी हुई बातों और अत्यन्त निहित बात को भी जानता है। अल्लाह ! उसके सिवा कोई 'इलाह' ( पूज्य ) नहीं। उसके सभी नाम शुभ हैं। नाम या परमात्मा की बराबरी नही परमात्मा और उसका नाम संसार की मीठी से मीठी और प्यारी से प्यारी चीजों से भी कहीं अधिक मीठा और प्यारा है ।  संसार की कोई भी वस्तु परमात्मा और उसके नाम की बराबरी नहीं कर सकता । बाबाजी के कथन : बीना नाम ना उतरे पार, अब है मौका करले विचार सतगुरु अंग-संग महसूस जब सुमिरन लगातार चलता रहता है तो हमें अपने अंदर दिव्य-चेतना का अस्तित्व महसूस होने लगता है । यह अपने आप में ही हमारा भजन-सुमिरन बन जाता है। सतगुरु के दिए नाम का प्रेमपूर्वक सुमिरन करने से सतगुरु अंग-संग महसूस होते हैं। भजन-सुमिरन सहज भाव से करना चाहिए। सुमिरन करने की गति तेज नहीं हो...

बीना नाम ना उतरे पार, अब है मौका करले विचार

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Radha Soami-संत हमेशा सच पर विचार रखते हैं। संत अपने हर सत्संग में सच के बारे में बतलाते हैं। उस सच के बारे में बतलाते हैं जो हम खुली आंखों से नहीं देख सकते। क्योंकि खुली आंखों से हम केवल संसार को और संसार के अंदर जो भी पदार्थ हैं, हम केवल उन्हीं को देख सकते हैं। सच के लिए वक्त के सतगुरु की शरण सच को जानने के लिए, सच को देखने के लिए हमें वक्त के संत सतगुरु की आवश्यकता पड़ती है। हमें वक्त के सतगुरु की शरण चाहिए। वक्त की संत सतगुरु से शब्द, नामदान की प्राप्ति करके, हमें उसका सुमिरन करना है। उस परमपिता परमात्मा की भक्ति करनी है। हमें भजन-सिमरन करना है ताकि सच से सामना हो सके। बाबाजी के विचार : प्रयास से ही प्रगति सम्भव है, हार ना मानें भजन सिमरन ही एक रास्ता संत महात्माओं ने अपने सत्संगों में, अपने किताबों में अपने अनुभव हमें समझाते हैं। संत ग्रंथों के जरिए हमें फरमाते हैं की परमात्मा से मिला करना या परमात्मा को पाना है तो केवल भजन-सुमिरन ही एक रास्ता है। इसके अलावा कोई और दूसरा रास्ता नहीं है। अगर भजन-सुमिरन करेंगे तो हम उस परमपिता परमात्मा से जा मिलेंगे। अ...

प्रयास से ही प्रगति सम्भव है, हार ना मानें ।

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महाराज सावन सिंह जी फ़रमाते है कि यह हरएक सत्संगी का धर्म है कि वह अपने मन को स्थिर करके तीसरे तिल में पहुँचे। गुरु का कर्तव्य सत्संगियों को इस मार्ग में मदद और रहनुमाई देना है। मन तथा इंद्रियों को क़ाबू करना और दसवीं गली में प्रवेश करना शिष्य की कोशिश पर निर्भर करता है। इस काम को पूरा करने में ख़ास बात अभ्यासी की कोशिश है। महाराज सावन सिंह जी  जिस पल हमें नाम दान की बख्शीश होती है हम पर भजन सुमिरन के लिए आवश्यक दया मेहर भी कर दी जाती है उसके बाद सब कुछ हमारी कोशिश पर निर्भर करता है कि हम उस दे मेहर का कितना फायदा उठा सकते है राधास्वामी सत्संग : सच को जानो, वही सच आपको परमात्मा से मिला सकता है: बाबाजी जैसी कि बड़े महाराज जी ने ऊपर दिए उद्धरण में फरमाया है, हमें अपने प्रयास द्वारा मन को स्थिर कर के तीसरे तिल पर पहुंचाना है। यह काम हमारे लिए सतगुरु नहीं करेंगे। यह हमारा काम है। हमें हर रोज भजन-सिमरन करना है। हम अंदर तभी भी जा पाएंगे, जब हम भजन-सुमिरन के लिए बैठेंगे और अपनी तवज्जुह को तीसरे दिन पर एकाग्र करेंगे। यह काम केवल हम ही कर सकते हैं। राधास्वामी सत्संग : आ...

सच को जानो, वही सच आपको परमात्मा से मिला सकता है: बाबाजी

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संत समझाते हैं कि इस दुनिया में जो कुछ भी हम अपनी आंखों से देख रहे हैं, जो कुछ भी इस दुनिया में हमें नजर आ रहा है। वह सब नाशवान है। एक दिन उनको नष्ट हो जाना है। मिट्टी में मिल जाना है। सच से करो प्यार संत समझाते हैं केवल सच से प्यार करो, सच की हकीकत जानो। क्योंकि सच ही है जो हमें उस परमात्मा से मिला सकता है। क्योंकि जो पदार्थ हम अपनी आँखों देख रहे हैं । वह सब बेकार की चीजें हैं। वह सब कूड़ा है। राधास्वामी :- आओ सत्संग की महिमा जानें और इससे फायदा उठायें सच्चे गुरु की संगत हमें सच्चे गुरु की संगत करनी है। सच्चे गुरु की सोहबत बात करनी है। सच्चे गुरु से युक्ति प्राप्त करके उस परमपिता परमात्मा की भक्ति करनी है। सुमिरन में ध्यान लगाना है। ज्यादा से ज्यादा समय हमें भजन सुमिरन में देना है। क्योंकि वही एक सच है। वही एक सच है, वही एक रास्ता है, जो हमें उस परमपिता परमात्मा से मिला सकता है। इसके अलावा कोई भी ऐसी युक्ति या कोई चीज नहीं है, जो इस संसार से हमें निकाल सके। भजन- सुमिरन एक रास्ता क्योंकि और जो कुछ भी हम देख रहे हैं। वह सब हमें वापस ले आती है। भजन- सुमिरन एक...

आओ सत्संग की महिमा जानें और इससे फायदा उठायें

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संत समझाते हैं कि संतो का साथ यानी सत्संग प्राप्त करना बहुत ही बड़े सौभाग्य की बात है। क्योंकि सत्संग हर किसी के भाग्य में नहीं होता। सत्संग सतगुरु ( परमात्मा ) की दया मेहर से ही प्राप्त होता है। सत्संग उन्हीं व्यक्ति विशेष को प्राप्त होता है, जिस व्यक्ति पर उस परमपिता परमात्मा की मेहर होती है। बिना उसकी मर्जी से हम कुछ भी प्राप्त नहीं कर सकते। सत्संग की महिमा संतों का सत्संग सुनकर हम अपने जीवन में काफी कुछ बदलाव ला सकते हैं। बहुत कुछ जीवन में प्राप्त कर सकते हैं। सत्संग एक ऐसी रूहानियत शक्ति है, जिसके जरिए हम उस परमात्मा रूपी मंजिल की तरफ जा सकते हैं। बिना सत्संग के हम उस तरफ अपने ध्यान को नहीं लगा सकते और सत्संग हमें तब प्राप्त होता है, जब हम किसी सतगुरु की शरण में जाते हैं , उसकी दया मेहर हमें होती है तो हमें सत्संग प्राप्त होता है। बाबाजी के विचार :- आंतरिक मार्ग की खोज, यानि निजघर का दरवाजा संतो का अनुभव संतों ने अपने अनुभव में फरमाया है की हमने जो कुछ भी हासिल किया है। हमने जो कुछ भी इस संसार में देखा है, हम उन सबको सत्संग के जरिए आपको फरमा रहे हैं। सत्संग ...