संदेश

कर्मों का हिसाब करना है तो ये काम करो।

चित्र
Radha soami- सभी संत यही दोहराते आए हैं कि कर्मों का हिसाब इसी जन्म में करना पड़ता है। लेकिन कर्मों का हिसाब तो करना पड़ेगा, मगर हम उसको बहुत सरल तरीके से कर सकते हैं। यानी कि हम अपने कर्मों का बोझ हल्का कर सकते हैं। अपने बुरे कर्मों का हिसाब, बोझ अगर हमें काम करना है, तो हमें एक आसान काम करना पड़ेगा। हमें किसी संत कि शरण में जाना होगा।  जिससे हम कर्मों के बारे में बहुत कुछ जान सकते हैं और उनसे कैसे छुटकारा पाया जाए। इसकी युक्त भी हमें मिल जाती है। संत बताते हैं की कर्मों का भुगतान तो हमें इसी योनि में करना पड़ता है। मगर हमें उनका कुछ कम कर सकते हैं। वह कैसे कर सकते हैं? कि हम अपने गुरु से नामदान की युक्ति प्राप्त करके और भजन-सुमिरन करके हम यह काम आसान कर सकते हैं। इसलिए हमें किसी पूरे गुरु की शरण में जाना चाहिए। उनसे रूहानियत के बारे में जानकारी प्राप्त करनी चाहिए। क्योंकि संतो को पूरा अनुभव होता है कि कैसे रूहानियत पर चल कर हम अपने कर्मों का बोझ हल्का कर सकते हैं। और अपने निजघर पहुंच सकते हैं। इसलिए हम सब भजन-सुमिरन करें परमात्मा को प्राप्त करें।

कर्मों का हिसाब इसी जन्म में हो जाता है, यक़ीन नहीं तो ये पढ़ो।

चित्र
Radha soami- सन्त-महात्मा बताते हैं कि अपने किये हुये सभी कर्मों का हिसाब इसी जन्म में हो जाता है। लेक़िन जीव समझ नहीं पाता। जो जीव किसी रूहानी विचारधारा वाले संगठन से जुड़ा है तो बड़ी आसानी से समझ सकता है। क्योंकि वहां पर रूहानियत के बारे में बताया जाता है कि कैसे जीव आने कर्मों का भुगतान करता है। किसी के कर्म आसानी से काट जाते हैं किसी को बहुत भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। महात्मा बताते हैं कि इस चौरासी के जेलखाने में सब जीव अपना भुगतान करने आते हैं। कोई जीव कीड़े - मकोड़े, कोई जीव जानवर, कोई जीव पक्षियों के जन्म लेकर अपने कर्मों का भुगतान कर रहे हैं। किसी के अच्छे कर्म होते हैं वो जीव अच्छे से जीवन व्यतीत करते हैं बाकी जीव पूरी जिंदगी परेशानियों में निकल देते हैं। बाबाजी के शब्द सुनने के लिए सब्सक्राइब करें। Radhasoami Shabad फिर बात आती है कि कर्मों को कैसे कम किया जाये। या कर्मों को कैसे काटा जाये। सन्त बताते हैं कि भाई किसी सन्त कि शरण में जाओ। किसी पूरे गुरु से रूहानियत की शिक्षा प्राप्त करो। नामदान प्राप्त करो। और भजन-सुमिरन करके अपने कर्मों का बोझ कम कर सकते ह...

नानक दुखीआ सभ संसार, आओ इस पर करें विचार

चित्र
Radha Soami - सन्त समझाते हैं की भजन-सिमरन द्वारा हमें आज के वर्तमान पल में विचरने, इस पल में एकाग्र और स्थिर होने का प्रशिक्षण मिलता है। ध्यान सुमिरन में रखने से हम हौमें को बल देने वाली अतीत की यादों और भविष्य की चिंताओं से मुक्त हो जाते हैं। जब ध्यान वर्तमान में हो तो मन हमें अपने जाल में नहीं फंसा सकता। ध्यान को सारे दिन भजन-सिमरन में रखने से हम इसे वर्तमान में खड़ा करने में सफल हो जाते हैं। इस तरह हम हौंमें के बंधनों से मुक्त हो जाते हैं और पल-पल जीवन का आनंद लेते हैं। संसार के सब लोग दुखों और मुसीबतों के सागर में गोते खा रहे हैं। कोई बेरोजगारी और निर्धनता के कारण दुखी है, किसी को रोग के कारण कष्ट है और किसी के घर में मृत्यु हो जाने से शोक छाया हुआ है। गुरु नानक साहिब कहते हैं  नानक दुखिआ सब संसार। सो सुखिया जिस नाम आधार।। मुसलमान संतों ने भी संसार को दुखों का घर कहा है। संसार के दो भाग हैं- जल और थल।  जल में छोटी मछली को बड़ी मछली खा जाती है और बड़ी मछली को और बड़ी मछली निंगल जाती है। थल पर भी बड़े पक्षी छोटे पक्षियों को और बड़े पक्षी छोटे पक्षियों को और छोट...
चित्र
Radha soami -कुछ दिन पहले मेरे साथ वाले गांव की एक सतसंगी की बात है। जिसे बाबा जी से नामदान मिला हुआ था। भजन करता रहा पर कुछ ना दिखने पर गुस्से हो गया और कुछ समय बाद वो गलत रास्ते पर जाने लगा।  वह एक पीर की पूजा करने लगा और धागा तवीज करने लगा। और उस पर पीर का साया आता था। बहुत साल बीत गए तो उसकी मौत हो गई। उसके और रिश्तेदार भी सतसंगी थे। उन्होंने ने सोचा की उसकी आत्मा का पता तो करें, की सतगुरु के पास है या उस पीर के पास।  दूसरे सत्संगी भाइयों ने जब उस सत्संगी के बारे में पूछा। जिसकी वो पूजा करता था । तो उसी पीर का साया किसी और पर भी चलता था। वह व्यक्ति भी नजदीक का था तो जब वो व्यक्ति गुरूवार को पीर के साये मे बैठा हुआ था, तो उन्हें पूछा- की वो तुम्हारे सेवक की मौत हो गई है तो वो तो आपके पास होगा। वो किस हालात मे है। तब उस व्यक्ति जो पीर के साये में था, उसने जवाब दिया की पहले आया तो वो हमारे पास ही था।  बाबाजी के शब्द जब सुन्दर और मनमोहक, छवि वाले सरदार जी आये । पर कुछ समय बाद एक बहुत सुन्दर और मनमोहक, छवि वाले सरदार जी आये थे। उसने कहा कि यह मेरा सत...

सेवा सिमरन औऱ सत्संग से सुख नही तो किसकी कमी: बाबाजी ने ये बताया

चित्र
Radha Soami - बाबाजी  फरमाते हैं नाम बड़ी ऊँची दौलत है। बड़े भाग्य से मिलता है। जो भाग्य से मिला है तो इसकी कदर करो। दबा कर कमाई करो। हमारा एक एक स्वांस करोड़ की कीमत का है। इसको ऐसे ही न खोवो। सतगुरु जिस दिन नाम देते उस दिन से शिष्य के अंदर बैठ जाते हैं, यह बात शिष्य नहीं समझता। यदि शिषय कमाई करे तो देख ले। बुलेशाह ने भी कहा है-  असाँ ते वख नहीं, देखन वाली अख नहीं, बिना शौह थी, दूजा कख नहीं। गुरु  नानक  देव  जी दुनिया  के  जीव  बहुत  बुरी  तरह  काल  के  जाल  में  फँसे  हुए  हैँ ।  जो  कर्म  पहले  किये  हैं। उनका  नतीजा  अब  रो-पीटकर  भोग  रहे  हैं और उसी  तरह  बुरे-खोटे  पाप  और  कर्म  करते  जा  रहे  हैं ।  भूले  हुए  हैं  कि  इनका  नतीजा  भोगने  के  लिये  फिर  इसी  चौरासी  के  चक्कर  में  आना  पड़ेगा ।...

भजन-सिमरन के द्वारा ही अंदरुनी दर्शन संम्भव है: बाबाजी

चित्र
Radha Soami -संत अपने अनुभव के अनुसार हमें रूहानियत के बारे में समझाते हैं। उनके हर सत्संग में केवल और केवल उस परमपिता परमात्मा की दर्शनों की बारे में  समझाते हैं। उनके दर्शन कैसे किए जाएं, उनकी दर्शन कैसे होते हैं, यही सब बातें हमें बार-बार संत-महात्मा उदाहरण दे देकर कर समझाते हैं। दर्शन कैसे होते हैं? कितने प्रकार की होते हैं? यही सब हम आज जानेंगे। रूहानियत में इन सब बातों का ध्यान रखना जरूरी है: बाबाजी          दर्शन तीव्र और गहरे प्रेम का नतीजा है। जब हम बिना कोई कोशिश की सतगुरु की ओर टकटकी लगाकर देखने के लिए मजबूर हो जाते हैं; जब हम उनके आभा मंडल को, उनके नूर को देखकर मुग्ध हो जाते हैं, दंग रह जाते हैं। जब हम उनकी और इस तरह खींचे चले जाते हैं जैसे कोई सुई चुंबक की ओर, जब हम उनकी मौजूदगी में इतने लीन हो जाते हैं, खो जाते हैं मानो दुनिया ठहर गई हो और किसी दूसरी चीज की अहमियत नहीं रहती; जब कशिश इतनी जबरदस्त होती है कि उस पर हमारा वश नहीं रहता और हम अपने आसपास की हर चीज से बेखबर हो जाते हैं- यह भी दर्शन हैं। ...

सत्संगों में से कुछ महत्वपूर्ण चुने हुये प्रेरणादायी वचन

चित्र
Radha Soami- संत हमेशा अपने सत्संग में केवल उस परमपिता परमात्मा की प्राप्ति का रास्ता बताते हैं। वहां पर केवल नाम की युक्ति के बारे में समझाते हैं। बताते हैं कैसे?  उस परमपिता परमात्मा को पाए जा सकता है। आज हमने कुछ महत्वपूर्ण शब्द चुने हैं जो रूहानियत के बारे में हमें बहुत सी जानकारी देते हैं। संत कहते हैं की सभी मनुष्य नामरूपी अनमोल रतन प्राप्त करने के लिए इस संसार में आते हैं। परंतु कोई विरले गुरमुख ही इस काम में सफल हो पाते हैं। जो नाम प्राप्त नहीं करते, उन्हें दोबारा जन्म लेना पड़ता है और माता के गर्भ में नौ माह तक उल्टे लटक कर घोर प्रायश्चित करना पड़ता है। उस समय आत्मा का ध्यान निरंतर तीसरे दिन में लगा रहता है और यही ध्यान उसकी रक्षा करता है। वह इस नरक से छुटकारा पाने के लिए प्रभु के चरणों में लगातार प्रार्थना करता रहता है कि अब जन्म मिलने पर वह प्रभु को एकदम याद रखेगा। राधा स्वामी संत मार्ग जन्म लेने के बाद परमात्मा को भूल जाता है मनुष्य जब जीव का जन्म होता है तो सारे परिवार में प्रसन्नता की लहर दौड़ जाती है और सब उससे प्यार करते हैं। उसे चारों और सुंदर दृश्य...