संदेश

प्रयास से ही प्रगति सम्भव है, हार ना मानें ।

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महाराज सावन सिंह जी फ़रमाते है कि यह हरएक सत्संगी का धर्म है कि वह अपने मन को स्थिर करके तीसरे तिल में पहुँचे। गुरु का कर्तव्य सत्संगियों को इस मार्ग में मदद और रहनुमाई देना है। मन तथा इंद्रियों को क़ाबू करना और दसवीं गली में प्रवेश करना शिष्य की कोशिश पर निर्भर करता है। इस काम को पूरा करने में ख़ास बात अभ्यासी की कोशिश है। महाराज सावन सिंह जी  जिस पल हमें नाम दान की बख्शीश होती है हम पर भजन सुमिरन के लिए आवश्यक दया मेहर भी कर दी जाती है उसके बाद सब कुछ हमारी कोशिश पर निर्भर करता है कि हम उस दे मेहर का कितना फायदा उठा सकते है राधास्वामी सत्संग : सच को जानो, वही सच आपको परमात्मा से मिला सकता है: बाबाजी जैसी कि बड़े महाराज जी ने ऊपर दिए उद्धरण में फरमाया है, हमें अपने प्रयास द्वारा मन को स्थिर कर के तीसरे तिल पर पहुंचाना है। यह काम हमारे लिए सतगुरु नहीं करेंगे। यह हमारा काम है। हमें हर रोज भजन-सिमरन करना है। हम अंदर तभी भी जा पाएंगे, जब हम भजन-सुमिरन के लिए बैठेंगे और अपनी तवज्जुह को तीसरे दिन पर एकाग्र करेंगे। यह काम केवल हम ही कर सकते हैं। राधास्वामी सत्संग : आ...

सच को जानो, वही सच आपको परमात्मा से मिला सकता है: बाबाजी

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संत समझाते हैं कि इस दुनिया में जो कुछ भी हम अपनी आंखों से देख रहे हैं, जो कुछ भी इस दुनिया में हमें नजर आ रहा है। वह सब नाशवान है। एक दिन उनको नष्ट हो जाना है। मिट्टी में मिल जाना है। सच से करो प्यार संत समझाते हैं केवल सच से प्यार करो, सच की हकीकत जानो। क्योंकि सच ही है जो हमें उस परमात्मा से मिला सकता है। क्योंकि जो पदार्थ हम अपनी आँखों देख रहे हैं । वह सब बेकार की चीजें हैं। वह सब कूड़ा है। राधास्वामी :- आओ सत्संग की महिमा जानें और इससे फायदा उठायें सच्चे गुरु की संगत हमें सच्चे गुरु की संगत करनी है। सच्चे गुरु की सोहबत बात करनी है। सच्चे गुरु से युक्ति प्राप्त करके उस परमपिता परमात्मा की भक्ति करनी है। सुमिरन में ध्यान लगाना है। ज्यादा से ज्यादा समय हमें भजन सुमिरन में देना है। क्योंकि वही एक सच है। वही एक सच है, वही एक रास्ता है, जो हमें उस परमपिता परमात्मा से मिला सकता है। इसके अलावा कोई भी ऐसी युक्ति या कोई चीज नहीं है, जो इस संसार से हमें निकाल सके। भजन- सुमिरन एक रास्ता क्योंकि और जो कुछ भी हम देख रहे हैं। वह सब हमें वापस ले आती है। भजन- सुमिरन एक...

आओ सत्संग की महिमा जानें और इससे फायदा उठायें

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संत समझाते हैं कि संतो का साथ यानी सत्संग प्राप्त करना बहुत ही बड़े सौभाग्य की बात है। क्योंकि सत्संग हर किसी के भाग्य में नहीं होता। सत्संग सतगुरु ( परमात्मा ) की दया मेहर से ही प्राप्त होता है। सत्संग उन्हीं व्यक्ति विशेष को प्राप्त होता है, जिस व्यक्ति पर उस परमपिता परमात्मा की मेहर होती है। बिना उसकी मर्जी से हम कुछ भी प्राप्त नहीं कर सकते। सत्संग की महिमा संतों का सत्संग सुनकर हम अपने जीवन में काफी कुछ बदलाव ला सकते हैं। बहुत कुछ जीवन में प्राप्त कर सकते हैं। सत्संग एक ऐसी रूहानियत शक्ति है, जिसके जरिए हम उस परमात्मा रूपी मंजिल की तरफ जा सकते हैं। बिना सत्संग के हम उस तरफ अपने ध्यान को नहीं लगा सकते और सत्संग हमें तब प्राप्त होता है, जब हम किसी सतगुरु की शरण में जाते हैं , उसकी दया मेहर हमें होती है तो हमें सत्संग प्राप्त होता है। बाबाजी के विचार :- आंतरिक मार्ग की खोज, यानि निजघर का दरवाजा संतो का अनुभव संतों ने अपने अनुभव में फरमाया है की हमने जो कुछ भी हासिल किया है। हमने जो कुछ भी इस संसार में देखा है, हम उन सबको सत्संग के जरिए आपको फरमा रहे हैं। सत्संग ...

आंतरिक मार्ग की खोज, यानि निजघर का दरवाजा

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संत-महात्मा आपने हर सत्संगों में फ़रमाते है कि हमे परमात्मा से मिलना है तो सच्चे आन्तरिक मार्ग की खोज करनी पड़ेगी। जो बहुत जरूरी है। अगर हमें अपने घर के अंदर जाना है तो सबसे पहले घर के दरवाजे की तलाश करनी पड़ती है। निजघर का वह दरवाजा आँखों के पीछे तीसरी आँख, एक आँख या तीसरा तिल है। भजन और सुमिरन के द्वारा उसी को खोलने के लिये हम उसको खटखटाते हैं यानी बार -बार सिमरन और ध्यान के द्वारा अपने फैले हुए ख़याल को आँखों के पीछे इकट्ठा करते हैं। जब बार-बार खटखटाने से यानि सिमरन और ध्यान से हमारा ख़याल इकट्ठा हो जाता है, तब उस घर का दरवाजा खुल जाता है।फिर हमें घर जाने का रास्ता मिलता है। बाबाजी की वाणी :- संतों की वाणी - अमृतवाणी कर देती उद्धार : बाबाजी फिर जब हम अपने ख़याल को वहाँ जाकर शब्द के साथ जोड़ते हैं, तो शब्द ला मार्ग खुल जाता है। उसके द्वारा हम वापस जाकर परमात्मा से मिलाप कर सकते हैं। बस थोड़ी मेहनत करनी है जो हमारे लिए बहुत जरूरी है। तुलसी साहिब फ़रमाते हैं:- कुदरती काबे की तू महराब में सुन ग़ौर से । आ रही धुर से सदा तेरे बुलाने के लिये।। मुसलमान लोग हज यानि काबे की...

संतों की वाणी - अमृतवाणी कर देती उद्धार : बाबाजी

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संत-महात्मा अपने सत्संगों में अक्सर फरमाया करते हैं की संत सत्य पर प्रकाश डालते हैं। सत्य का अनुभव हमारे सामने रखते हैं। सत्य क्या है? यह सब बातें सत्संग के जरिए हमें समझाते हैं। संत अपनी वाणी में इतना असरदार रस खोलते हैं कि उनकी वाणी अमृत के समान लगती है। क्योंकि वे अपनी वाणी में सच पर जोर देते हैं। संत महात्मा समझाते हैं :- जो पौधा हम लगाते हैं,  उसकी वृद्धि करना हमारे बस में नहीं है। वह पौधा अपने समय पर ही फूलेगा-फलेगा। हमारा काम तो महज गड्ढा खोदकर, खाद डालकर, बीज बोकर उसे मिट्टी से ढक देना है। उसे पानी देना है, उसकी कीड़ों से रक्षा करनी है तथा रोज-रोज उसकी देखभाल करना है। यह भी पढें :- कैसे जानें? वक़्त के सतगुरु से रूहानियत की राह हम केवल इतना ही कर सकते हैं। किस गति से पौधा पड़ता है, यह हमारे हाथ में नहीं है। अगर भजन-सिमरन के प्रति भी हमारी ऐसी ही मनोवृति हो जाए तो हम सतगुरु के काम में बाधा नहीं डालेंगे और आध्यात्मिकता का पौधा निश्चय ही बढेगा और हमारे जीवन में फलीभूत होगा। अपने आपको मजबूत बनाये : अगर पौध की जड़े पूरी तरह से गहरी और मजबूत होने...

कैसे जानें? वक़्त के सतगुरु से रूहानियत की राह

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Radha Soami-संत-महात्माओं का संदेश हर जाति के लिए, हर कौम के लिए, हर मजहब के लिए होता है। संत-महात्मा अपनी वाणीयों में रूहानियत का जिक्र करते हुए फरमाते हैं की हर एक जीव के अंदर परमात्मा वास करता है। हर एक जीव, पशु , पक्षी के अंदर परमात्मा बसा हुआ है। हमें केवल पहचानने की जरूरत है। और इसकी पहचान कैसे की जाए। इसकी हमें कैसे जानकारी मिले। इसके लिए हमें किसी वक्त के संत-सतगुरु की आवश्यकता होती है, जो हमें इस राह की जानकारी दे सकें। वक़्त के सतगुरु की शरण हमें किसी वक्त की सतगुरु की शरण लेनी होती है। उनके सतसंग का समागम करना होता है। हमें उनके विचारों को सुनकर, उनके विचारों पर अमल करना होता है। क्योंकि जब तक हम उनके विचारों पर अमल नहीं करेंगे, उनके कहने के अनुसार नहीं चलेंगे तो हम रूहानियत की राह पर नहीं चल सकेंगे, और ना हम उस परमात्मा को पा सकेंगे। इसलिए संत महात्मा समझाते हैं कि सबसे पहले किसी इस वक्त की संत सतगुरु की शरण में जाओ और उसे रूहानियत के बारे में जानकारी प्राप्त करो। बाबाजी के विचार :- परमात्मा को पाना है? जानें ये विधि बाबा जी फरमाते हैं कि जब...

परमात्मा को पाना है? जानें ये विधि

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संतमत का सिद्धांत है, कि हमेशा हक-हलाल की कमाई पर गुजारा करना, नेक नियत पर चलना, कभी भी परमात्मा आपका बुरा नहीं करेगा। सामने वाला चाहे आप का कितना भी बुरा करने की कोशिश क्यों ना करें, परंतु वह परमात्मा आप का बुरा नहीं होने देंगे। परमात्मा को हर एक जीव के बारे में पूरा ज्ञान होता है कि उसके अंदर क्या चल रहा है। उसकी सोच कैसी है। उसका दूसरे व्यक्ति के लिए दिल में क्या जगह है। परमात्मा नेक नीति वाले व्यक्ति के हमेशा साथ रहते हैं। और उसका हर एक मुसीबत की स्थिति में साथ खड़े रहते हैं। बाबाजी के विचार :-  बाबाजी के इन वचनों का कोई मोल नही है। क्या है यें वचन? परमात्मा की युक्ति पाना सौभाग्य की बात परमात्मा हमेशा अपने शिष्य की देखरेख करता है। और जो मनुष्य परमात्मा से जुड़े होते हैं, जो उस परमात्मा की याद में समय बिताते हैं। वह जीव मालिक के प्यारे होते हैं। परमात्मा की भक्ति करना बहुत बड़े सौभाग्य की बात है, क्योंकि उस परमात्मा की मंजूरी से ही हमें उस परमात्मा की शरण में जाने का मौका मिला। हमें एक देहधारी सतगुरु की शरण मिली। जिसके जरिए हम इस मनुष्य जन्म का लाभ उठा सकते ...